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आयुर्वेद उपचार: क्षणिक इस्केमिक अटैक, यूएमएन फेशियल पाल्सी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिए

हमारे आयुर्वेद केस अध्ययन आयुर्वेद चिकित्सा साहित्य में प्रथम पंक्ति के साक्ष्य हैं क्योंकि वे हमारे आयुर्वेद चिकित्सकों के मूल अवलोकन प्रस्तुत करते हैं।

विषय-वस्तु का केस अध्ययन

संक्षिप्त चिकित्सा इतिहास

अपोलो आयुर्वैद में एक मरीज पिछले 3 सालों से शरीर के बाएं हिस्से में कमजोरी की शिकायत लेकर आया था। पिछले 2 सालों से उसे सिरदर्द भी था, जो बढ़ता और कम होता रहता था। उसे अपनी बाईं आंख को पूरी तरह से बंद करने में भी दिक्कत हो रही थी। पिछले 2 सालों से उसे कभी-कभी पानी आने और होठों और जीभ में सुन्नपन की शिकायत थी।

उनके लक्षणों और स्थिति को देखते हुए, अपोलो आयुर्वेद ने 6 दिनों की अवधि के लिए 'अवर्णजन्य वात व्याधि, अर्धतम, प्रमेह और व्यान प्रबल' के उपचार का उपयोग करने का निर्णय लिया, साथ ही तीन महीने तक अनुवर्ती अवधि भी निर्धारित की।

अपनाई गई चिकित्सा रणनीति में निम्नलिखित शामिल थे:

  • स्निग्धा स्वेदा द्वारा वात समाना, साथ में मूर्धनी थैला (सिरोवस्ति) जिसके बाद नस्यम किया गया
  • वातहर के उद्देश्य के लिए आंतरिक औषधि, जिसने स्थिति को और अधिक बढ़ने से रोका।

उपचार सफल रहा और डिस्चार्ज के समय प्रभावित हिस्से पर सुन्नपन और दर्द काफी कम हो गया। अनुवर्ती अवधि के दौरान मुखाभ्यांग, प्रतिमार्श नास्यम और आंतरिक दवा से आंखों की मांसपेशियों को उचित शक्ति मिलने की उम्मीद थी, इस प्रकार एपिफोरा कम हो गया। डिस्चार्ज के समय रक्तचाप और महत्वपूर्ण अंग स्थिर थे। हालांकि, मधुमेह और उच्च रक्तचाप के लिए एलोपैथिक दवाएं जारी रखनी थीं।

निष्कर्ष

निष्कर्ष एवं निष्कर्ष:

उच्च रक्तचाप और TIA के लक्षणों वाले रोगियों की TIA के आगे के हमले के लिए नियमित रूप से निगरानी की जानी चाहिए। इसके अलावा, इसके आगे के हमलों को रोकने के लिए सभी उपाय किए जाने चाहिए। उपचार ने वर्तमान स्थिति में काफी हद तक राहत दी है। हालाँकि नियमित समीक्षा और पथ्य से बेहतर राहत मिलने की उम्मीद है।

मरीज़ों की कहानियाँ

मरीज़ों के प्रशंसापत्र

* परिणाम व्यक्ति दर व्यक्ति अलग-अलग हो सकते हैं

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प्रचालन का समय:
सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक (सोमवार-शनिवार)
सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक (रविवार)

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